भारतीय बाजार नियामक (SEBI) ने घोषणा की है कि वह शेयर उधार लेने-बाँटने (lending & borrowing of shares) की प्रक्रियाओं को और सरल बनाने की दिशा में विचार कर रहा है।
वर्तमान में इस प्रणाली की गतिविधियाँ सीमित हैं और केवल कुछ चयनित शेयरों में ही इसे लागू किया जाता है। नियामक का लक्ष्य इसे व्यापक स्तर पर लागू करके तरलता (liquidity) बढ़ाना है और शेयर बाजार के नकद (cash) बाज़ार के प्रदर्शन को मजबूती देना है।
यदि यह प्रस्ताव सफल हुआ, तो निवेशकों को शॉर्ट सेलिंग (short selling) करने की अधिक सुविधा मिलेगी। इससे बाजार की मूल्य खोज (price discovery) बेहतर होगी और बड़े लेनदेन बिना कीमतों पर दबाव डाले किए जा सकेंगे।





