महाराष्ट्र

कक्षा 6 की छात्रा की कथित सज़ा से मृत्यु: वसई–विरार में विद्यालय पर बड़ी कार्रवाई की मांग तेज

वसई–विरार के एक विद्यालय में देर से आने पर छात्रा को 100 दंड-बैठकें करने का कथित आदेश दिया गया, जिसके कुछ दिनों बाद उसकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है।

 


17 नवंबर 2025, सोमवार — महाराष्ट्र के वसई–विरार क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने शिक्षा संस्थानों की कार्यप्रणाली और बाल अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वसई–विरार स्थित श्री हनुमत विद्या मंदिर नामक विद्यालय में कक्षा 6 में पढ़ने वाली 13 वर्षीय छात्रा अंक्शिका गौड़ को विद्यालय में देर से पहुँचने के कारण कथित रूप से 100 दंड-बैठकें करने का आदेश दिया गया था। परिवार के अनुसार इस कठोर दंड के बाद बच्ची की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और कुछ दिनों बाद उसकी मृत्यु हो गई।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह विद्यालय नियमों के विरुद्ध संचालित किया जा रहा था तथा नगर पालिका ने इसे पहले भी चेतावनी दी थी। इसके बावजूद विद्यालय प्रशासन ने आवश्यक मानकों का पालन नहीं किया। घटना के बाद अभिभावकों में भारी रोष है और वे विद्यालय तथा जिम्मेदार शिक्षकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

इस मामले ने विद्यालयों में शारीरिक दंड की प्रथा, बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा संस्थानों की जवाबदेही पर एक बार फिर गहन बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाल संरक्षण कानून स्पष्ट रूप से किसी भी प्रकार के शारीरिक दंड को प्रतिबंधित करता है, फिर भी कई निजी एवं अनियमित विद्यालयों में कठोर दंड दिया जाना आम बात बन चुका है।

राज्य शिक्षा विभाग ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विद्यालय की मान्यता, प्रबंधन की जवाबदेही, शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। यदि दोष सिद्ध होता है, तो विद्यालय पर कठोर कार्रवाई की जा सकती है तथा जिम्मेदार व्यक्तियों पर आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया जा सकता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस घटना ने माता-पिता के भीतर भय और अविश्वास पैदा कर दिया है। उनका मानना है कि राज्य सरकार को ऐसे निजी विद्यालयों की नियमित निगरानी बढ़ानी चाहिए ताकि बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और तनाव-मुक्त वातावरण मिल सके।

यह हादसा शैक्षणिक व्यवस्था की कमियों, असंगठित विद्यालयों के संचालन और बच्चों के साथ होने वाले कठोर व्यवहार की ओर ध्यान आकर्षित करता है। अब सबकी नजरें राज्य सरकार की जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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