पश्चिम बंगाल

जलपाईगुड़ी में BLO की आत्महत्या: SIR के दबाव से तंग आकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शांति मुनी एकका ने दी जान, ममता ने EC पर साधा निशाना

कोलकाता, 20 नवंबर 2025: पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के मायनागुड़ी थाना क्षेत्र के मालबाजार में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया। एक 45 वर्षीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) शांति मुनी एकका ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। उनका शव मंगलवार शाम उनके घर के आंगन में लटका मिला। परिवार का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अत्यधिक दबाव के कारण यह कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए चुनाव आयोग (ECI) पर 'अमानवीय' दबाव डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के कारण अब तक 28 BLO की मौत हो चुकी है, जो राज्य सरकार के लिए चिंता का विषय है।

 

 

पुलिस के अनुसार, शांति मुनी एकका आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखती थीं और वे मालबाजार के एक आंगनवाड़ी केंद्र पर कार्यरत थीं। SIR प्रक्रिया के तहत उन्हें अपने बूथ के 1200 से अधिक वोटरों के दस्तावेजों की जांच और सत्यापन का जिम्मा सौंपा गया था। परिवार के सदस्यों ने बताया कि पिछले एक महीने से वे लगातार तनाव में थीं। उनके बेटे ने कहा, "मां रोज रात देर तक दस्तावेजों की जांच करतीं और कहतीं कि इतना काम एक व्यक्ति के बस का नहीं।" पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और प्रारंभिक जांच में सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन परिवार का दावा है कि SIR का बोझ ही इसका कारण है। स्थानीय एसपी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और किसी संदिग्ध गतिविधि की आशंका नहीं है।

यह घटना पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के खिलाफ बढ़ते असंतोष को उजागर करती है। राज्य में पिछले दो महीनों में 28 BLO की मौतें दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें से अधिकांश तनाव या हृदयाघात से जुड़ी बताई जा रही हैं। ममता बनर्जी ने तुरंत EC को पत्र लिखकर SIR को तत्काल रोकने की मांग की है। उन्होंने कहा, "यह प्रक्रिया पहले तीन साल में पूरी होती थी, लेकिन अब चुनाव से ठीक पहले दो महीनों में थोप दी गई है। BLO जैसे साधारण कार्यकर्ताओं पर यह अन्याय है।" विपक्षी भाजपा ने ममता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार BLO को पर्याप्त सहायता नहीं दे रही। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने ट्वीट किया, "ममता जी बिहार चुनाव के नतीजों से डर गई हैं और अब EC को दोष दे रही हैं।" सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि BLO के लिए अलग से टीम गठित की जाए और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान की जाए। यह त्रासदी न केवल एक परिवार का दुख है, बल्कि पूरे राज्य के लिए चेतावनी है कि प्रशासनिक दबाव से मानवीय जीवन को खतरा हो सकता है। जिला प्रशासन ने परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता का ऐलान किया है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या यह पर्याप्त है?

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