जम्मू और कश्मीर में भारत-पाक तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, और अन्य क्षेत्रीय दलों ने केंद्र सरकार पर 2019 में खत्म किए गए विशेष राज्य के दर्जे को बहाल करने का दबाव बढ़ा दिया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला ने एक रैली में कहा, "जम्मू और कश्मीर के लोगों का हक है कि उन्हें उनका राज्य और सम्मान वापस मिले।"
केंद्र सरकार ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान सुरक्षा स्थिति में यह संभव नहीं है। बीजेपी नेताओं का दावा है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद क्षेत्र में विकास और शांति बढ़ी है। हालांकि, स्थानीय लोग और विपक्षी दल इससे असहमत हैं, और उनका कहना है कि बिना राज्य के दर्जे के प्रशासनिक और राजनीतिक समस्याएं बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया पर युवाओं ने इस मुद्दे को उठाया, और कई ने केंद्र की नीतियों को "कश्मीर विरोधी" करार दिया। यह मांग जम्मू और कश्मीर की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है, खासकर तब जब क्षेत्र में विधानसभा चुनाव की चर्चा भी चल रही है।





