भारत-पाक सीजफायर उल्लंघन का राजनीतिक असर: सरकार पर बढ़ा दबाव

भारत और पाकिस्तान के बीच 11 मई को हुए सीजफायर समझौते के कुछ ही घंटों बाद श्रीनगर और जम्मू में ड्रोन हमले और गोलीबारी की घटनाओं ने जम्मू और कश्मीर की राजनीति में हलचल मचा दी। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सुरक्षा व्यवस्था में चूक का आरोप लगाया, जबकि सत्तारूढ़ दल ने इसे पाकिस्तान की कायराना हरकत करार दिया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा, "सीजफायर का उल्लंघन केंद्र की कश्मीर नीति की नाकामी है।"

 

यह घटना ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई, जिसने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया। जम्मू और कश्मीर के नेताओं ने केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने सीजफायर उल्लंघन को लेकर संयुक्त राष्ट्र से मध्यस्थता की अपील की, जिसे बीजेपी ने "राष्ट्रविरोधी" करार दिया। स्थानीय निवासियों में डर का माहौल है, और कई नेताओं ने सीमा पर शांति बहाली के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। यह स्थिति जम्मू और कश्मीर की राजनीति में केंद्र और स्थानीय दलों के बीच तनाव को और गहरा सकती है, खासकर तब जब क्षेत्र पहले से ही सुरक्षा और विकास के मुद्दों से जूझ रहा है।

 

 

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