जम्मू-कश्मीर में पहली बार विशेष सैनिक ट्रेन का परीक्षण, LOC के पास तैनाती होगी तेज़
भारतीय रेलवे ने जम्मू-कश्मीर में विशेष सैनिक ट्रेन का परीक्षण किया है जो LoC के पास रणनीतिक तैनाती को तेज़ और अधिक संगठित बनाएगा। यह कदम सैन्य लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में बड़ी प्रगति मानी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर में रक्षा तैयारियों को और सुदृढ़ करने की दिशा में भारतीय रेलवे और रक्षा मंत्रालय ने मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है। 13 मई 2025 को एक विशेष सैनिक ट्रेन का सफल परीक्षण किया गया, जो अब LoC (लाइन ऑफ कंट्रोल) के पास तैनात होने वाले जवानों और हथियारों की आवाजाही को पहले से कहीं अधिक तेज और संगठित बनाएगी।
यह विशेष ट्रेन उधमपुर से रवाना होकर राजौरी और पुंछ जैसे सीमावर्ती इलाकों तक गई, जहां सामान्य यात्री ट्रेनों की पहुंच अब तक संभव नहीं थी। इस ट्रेन में सैनिकों के साथ-साथ उनकी ज़रूरी युद्ध सामग्री, राशन, चिकित्सा उपकरण, और संचार प्रणाली के साधन भी थे। इसके लिए रेलवे ने विशेष तौर पर "मिलिट्री रैकेटिंग सिस्टम" तैयार किया है, जिससे मिनटों में जवानों को तैनात किया जा सके।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण भविष्य की सामरिक तैयारियों में मील का पत्थर साबित होगा। खास तौर पर भारत-पाकिस्तान सीमा के तनाव वाले क्षेत्रों में सेना की आवाजाही जितनी तेज़ होगी, प्रतिक्रिया उतनी ही प्रभावी हो सकेगी।
भारतीय सेना के प्रवक्ता ने बताया कि यह प्रयोग सफल रहा और जल्द ही स्थायी रूप से ऐसी ट्रेनें जम्मू-कश्मीर के प्रमुख सैन्य मार्गों पर चलाई जाएंगी। इससे हवाई परिवहन पर दबाव कम होगा और आपदा या संघर्ष के समय ज्यादा संख्या में जवानों की तैनाती संभव हो सकेगी।
सेना के साथ-साथ रेलवे मंत्रालय ने भी इस ऑपरेशन को “मॉडर्न मिलिट्री सपोर्ट सिस्टम” का हिस्सा बताया है। भविष्य में इसी प्रणाली को लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और सियाचिन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तक ले जाने की योजना है। रेलवे मंत्री ने इसे "न्यू इंडिया की सैन्य लॉजिस्टिक्स में क्रांति" करार दिया है।





