भारत की जैव-अर्थव्यवस्था अगले वर्षों में 300 बिलियन डॉलर की ओर — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री का अनुमान
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मन्त्रालय के अनुसार, भारत की जैव-अर्थव्यवस्था (bioeconomy) आने वाले वर्षों में लगभग 300 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुँच सकती है।
मंत्री ने बताया कि भारत अब जैव-प्रौद्योगिकी द्वारा प्रेरित अगली औद्योगिक क्रांति (industrial revolution) में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि देश में जैव-नवाचार (bio-innovation), जैविक संसाधन, जैव-औषधि तथा जैव-विविधता पर आधारित तकनीक तेजी से विकसित हो रही है। उदाहरणतः, जैव-उद्योग क्षेत्र में बायोफर्टिलाइज़र, जैव-उद्योग वर्धित खेती, जैव-चिप्स एवं चिकित्सा-उपकरण जैसी प्रौद्योगिकियाँ मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की दिशा न सिर्फ आर्थिक वृद्धि को त्वरित करेगी बल्कि वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में भारत को एक केंद्र बना सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इसके लिए बुनियादी ढाँचे, शोध-वित्तपोषण व मानव-संशाधनों में सुधार जरूरी होगा।





