ट्रेजरी घोटाले पर हेमंत सरकार की बड़ी कार्रवाई: CID-SIT जांच के आदेश, हर जिले में विशेष ऑडिट
रांची : झारखंड के कई जिलों में सामने आए ट्रेजरी घोटाले को लेकर राज्य सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। सरकार ने इस मामले को गंभीर मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है और एक साथ कई बड़े फैसले लिए हैं। अब इस पूरे मामले की आपराधिक जांच CID करेगी, वहीं राज्य के सभी ट्रेजरी का स्पेशल ऑडिट महालेखाकार से कराने का निर्णय भी लिया गया है। इसके अलावा मामले की तह तक जाने के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन भी कर दिया गया है।
SIT का नेतृत्व करेंगे उत्पाद सचिव अभिताभ कौशल
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस SIT की कमान उत्पाद सचिव अभिताभ कौशल को दी गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके नाम पर सहमति दे दी है। माना जा रहा है कि वित्त विभाग इस संबंध में आधिकारिक आदेश शुक्रवार को जारी कर सकता है। सरकार का मानना है कि जब तक इस घोटाले में शामिल पूरे नेटवर्क की जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी। इसलिए अब जांच को सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जा रहा है।
सरकार ने इस घोटाले को गंभीर अपराध मानते हुए CID को आपराधिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। CID अब यह पता लगाएगी कि फर्जी भुगतान किस तरीके से हुआ, किसने सिस्टम का दुरुपयोग किया और इसमें किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही। CID के पास अब अधिकार होगा कि वह दस्तावेजों की जांच, कर्मचारियों से पूछताछ और तकनीकी जांच के जरिए पूरे मामले की परतें खोले।
सभी ट्रेजरी का महालेखाकार से होगा स्पेशल ऑडिट
सरकार ने इस मामले में एक और बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के सभी ट्रेजरी का स्पेशल ऑडिट कराने का फैसला लिया है। इसके लिए महालेखाकार को जिम्मेदारी दी जाएगी। इस ऑडिट के जरिए यह देखा जाएगा कि कहां-कहां अनियमित भुगतान हुए हैं, किस मद में पैसा निकाला गया और क्या कोई पैटर्न बनता है जिससे पूरे घोटाले की कड़ी जुड़ सके।
सभी DDO से मांगी गई रिपोर्ट, कर्मचारियों की तैनाती पर नजर
राज्य सरकार ने इस मामले में सभी DDO यानी ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर को निर्देश दिया है कि वे जरूरी जानकारी जुटाएं और रिपोर्ट दें। ट्रेजरी अधिकारियों को कहा गया है कि वे DDO से प्रमाण पत्र लें। इस प्रमाण पत्र में यह साफ लिखा होना चाहिए कि कौन विपत्र लिपिक, लेखा लिपिक और लेखापाल कितने समय से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि जो कर्मचारी तीन साल से ज्यादा समय से एक ही जगह जमे हुए हैं, उनकी अलग सूची तैयार की जाए। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कहीं लंबे समय से एक ही जगह टिके कर्मचारी किसी गड़बड़ी का हिस्सा तो नहीं बने।
OTP वाले खेल की भी जांच, मोबाइल नंबर पर शक
सरकार ने जांच में एक नया और अहम पहलू जोड़ा है। वित्त विभाग ने यह जानकारी भी मांगी है कि कहीं DDO और विपत्र लिपिक एक ही मोबाइल नंबर पर OTP तो प्राप्त नहीं कर रहे हैं। सरकार को आशंका है कि अगर एक ही नंबर पर OTP जा रहा है तो यह सिस्टम में मिलीभगत और अंदरूनी खेल का संकेत हो सकता है। इसी आधार पर अब डिजिटल रिकॉर्ड और मोबाइल नंबर से जुड़ी जांच को भी तेज किया जाएगा।
सरकार का संदेश साफ, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
हेमंत सरकार का कहना है कि इस घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। CID जांच, SIT की निगरानी और महालेखाकार के स्पेशल ऑडिट के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।




